नयी कविता-नई कविता का सम्पूर्ण परिचय(Nayi kavita)

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नई कविता का परिचय

Nayi kavita, नई कविता

प्रयोगवाद का विकास ही कालांतर में ‘नई कविता” के रूप में हुआ। वस्तुतः प्रयोगवाद और नई कविता में कोई सीमा रेखा नहीं खींची जा सकती | बहुत से कवि जो पहले प्रयोगवादी रहे, बाद में नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर बन गए। इस प्रकार ये दोनों एक ही काव्यधारा के विकास की दो अवस्थाएँ हैं। सन्‌ 1943 ई. से 1953 ई. तक की कविताओं में जो नवीन प्रयोग हुए.

नई कविता उन्हीं का परिणाम है। 1943 से 1953 तक की कविता को प्रयोगवादी एवं 1953 के बाद की कविता को नई कविता की संज्ञा दी जा सकती है।

नई कविता की पहली विशेषता जीवन के प्रति उसकी आस्था है। इन कविताओं में आज़ की क्षणवादी और लघु-मानववादी दृष्टि जीवन-मूल्यों के प्रति नकारात्मक नहीं. सकारात्मक स्वीकृति है।
नईकविता में जीवन को पूर्ण रूप से स्वीकार करके उसे मोगने की लालसा दिखाई देती है। अनुभूति की सच्चाई नई कविता में दिखाई देती है। समाज की अनुभूति कवि की अनुभूति बनकर ही कविता मैं व्यक्त हुई है। नई कविता जीवन के एक-एक क्षण को सत्य मानती है और उस सत्य को पूरी हार्दिकता और पूरी चेतना से भोगने का समर्थन करती है। नई कविता में जीवन-मूल्यों की फिर से नए दृष्टिकोण से व्याख्या की गई है। नई कविता में व्यंग्य के रूप में पुराने मूल्यों को अस्वीकार किया गया है। लोक-सम्पृक्ति नई कविता की खास विशेषता है। वह सहज लोक-जीवन के करीब पहुँचने का प्रयत्न करती है।

प्रयोगवादी कविता के आगे का दौर नई कविता के रूप में उभरा है।नई कविता स्वतंत्रा के बाद लिखी गई वह कविता है जिसमें नवीन भाव बोध ,नए मूल्य और नया शिल्प विधान है।
नई कविता की विशेषताऐं-


1-नई कविता के कवियों ने यथार्थ का चित्रण किया है|
2-नई कविता जीवन के प्रत्येक क्षण को सत्य मानती है|
3-नई कविता के कवियों ने मानव की निराशा कुंठा व संत्रास का मनोवैज्ञानिक ढंग से चित्रण किया है|
4-नए प्रतीक रूप क  तथा उपमानो की नई भाषा शिल्प में अभिव्यक्ति हुई है|
5-इस काल में मानव जीवन की विसंगतियों अनैतिकतावादी मान्यताओं पर व्यंग रचनाएं लिखी गई हैं.|

नई कविता के प्रमुख कवि


भवानी प्रसाद मिश्र – सन्नाटा, गीत फरोश, चकित है दुख
दुष्यंत कुमार- सूर्य का स्वागत, आवाजों के घेरे
श्रीकांत वर्मा- मगध, माया दर्पण
जगदीश गुप्त- नाव के पॉव ,बोधि वृक्ष

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